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Volume No. :   6

Issue No. :  4

Year :  2018

Pages :  518-520

ISSN Print :  2347-5145

ISSN Online :  2454-2687


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छत्तीसगढ़ की पिछड़ी जनजाति पहाड़ी कोरवा



Address:   आभा किषोरी खलखो1, डाॅ. डी.एन.वर्मा2
1षोधार्थी, अर्थषास्त्र अध्ययनषाला, पं. रविषंकर षुक्ल विष्वविद्यालय, रायपुर, छत्तीसगढ़
2प्राचार्य, शासकीय नार्गाजुन स्नातकोतर विज्ञान महाविद्यालय, रायपुर छतीसगढ़
*Corresponding Author
DOI No:

ABSTRACT:
कोरवा जनजाति आधुनिक सभ्यता से दूर घने जंगलों, मरूस्थलों एंव दुर्गम पर्वतों में निवासरत है। जनजातियां हमारी सभ्यता के वे अंग है जो विकास की प्रक्रिया में पिछड़ गये है। और अपने विचारों एंव जीवन पध्दति में हमारे विेकास की प्रक्रिया छुपाये हुये है। देष की कुल अनुसूजित जनजातियो का 8.4 प्रतिषत जनसंख्या छत्तीसगढ़ में निवासरत है, छत्तीसगढ़ एक जनजातीय बाहुल्य राज्य है। राज्य की कुल अनुसूचित जनजातियों का 30.62 प्रतिषत जनजातीयों की है, देष में कुल 75 विषेष पिछड़ी जनजातीय समूह है। जिसमें से 7 पिछड़ी जनजाति छत्तीसगढ राज्य में निवास करती है, इन्ही जनजातीयों मेें से एक है पहाड़ी कोरवा। छत्तीसगढ़ में पिछड़ी जनजाति की कुल जनसंख्या 3,10,625 है जिसमें केवल पहाड़ी कोरवा जनजाति की कुल जनसंख्या 1,29,429 है, छत्तीसगढ़ में पहाड़ी कोरवा जषपुर, सरगुजा, बलरामपुर, कोरबा एंव रायगढ़ जिलों में मुख्य रूप से पाई जाति है।
KEYWORDS:
साक्षरता, पहाड़ी कोरवा छत्तीसगढ़ ।
Cite:
आभा किषोरी खलखो, डी.एन.वर्मा. छत्तीसगढ़ की पिछड़ी जनजाति पहाड़ी कोरवा. Int. J. Rev. and Res. Social Sci. 2018; 6(4): 518-520.
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